बस्ती। नगर वासियों को याद भी नहीं होगा, कि कब बड़े नालों की सफाई हुई होगी। हम आप को बताते हैं, कि कब हुई। 25 साल पहले यानि चेयरपर्सन रुपम श्रीवास्तव के कार्यकाल में अंतिम बार बड़े नालों की सफाई हुई थी, उसके बाद नहीं हुई? क्यों नहीं हुई, यह ईओ और चेयरपर्सन के लिए सवाल है। इन्हें षायद यह नहीं मालूम कि जब तक बड़े नालों की सफाई नहीं होगी, तब तक पानी आगे नहीं जाएगा, और जब पानी आगे नहीं जाएगा, तो सिल्ट जमा होगा, बीमारियां होगी। इस लिए छोटे नालों और नालियों की सफाई से अधिक बड़े नालों की सफाई ध्यान देना चाहिए, ताकि छोटे नालों का पानी बड़े नालों में जाया जा सकेगा। बड़े नालों की सफाई न करके अगर पालिका सिर्फ छोटे नालों और नालियों की सफाई करती है, तो जनता इसे धन का दुरुपयोग मानती। बड़े नालों की सफाई इस लिए आवष्यक मानी जा रही है, क्यों जितने भी बड़े नाले हैं, सबकी गहराई 10-12 फिट की है। यानि अगर 10-12 फिट के सिल्ट की सफाई हो जाती है, तो समझ लीजिए कि छोटे नालों का पानी का बहाव तेज हो जाएगा।

ईओ साहब को ध्यान देने वाली बात है, कि भुजैनिया पोखरे में बड़े नालों का पानी इसी पोखरे में जाता है। पुरानी बस्ती का बड़ा नाला भी इसी से ही जुड़ा है। नार्मल स्कूल के बगल गंदा नाला का पानी लौकिहवा होते हुए अमहट तक जाता है। पुरानी बस्ती और भुजैनिया पोखरा से जो नाला जाता है, वह रैपुरा होते हुए वाल्टरगंज होते हुए कुआनों चला जाता है। यह सही है, कि जो बड़े नाले 25 साल सफाई नहीं हुए, उसमें कितना सिल्ट जमा होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन होगा, लेकिन अगर पालिका बड़े नालों की सफाई करवाने में सफल होता तो बरसात में जलजमाव की समस्या समाप्त हो सकती है। छोटे नालों को जाम होने से बचाना है, तो ईओ साहब और मैडम चेयरपर्सन को बड़े नालों की सफाई का मामला बोर्ड की बैठक में लाना होगा, क्यों कि इसके लिए धन की भी आवष्यकता होगी।