बस्ती। अब जरा अंदाजा लगाइए कि अगर एक रुपया में एक्सरे और अल्टरसाउंड होने लगेंगे तो प्राइवेट के सेंटरों पर तो ताला लग जाएगा। कहना गलत नहीं होगा कि ‘पहल’ नामक संस्था के संरक्षक मनीष मिश्र की ओर से जो पहल करने की घोषणा की गई, उससे कहा जा रहा है, कि इससे तो जिले भर के सारे अल्टासाउंड और एक्सरे सेंटरों पर ताला लग जाएगा, क्यों मरीज हजार-पांच सौ देने जाएगा? अगर मिश्राजी अपनी योजना को साकार देने में सफल हो गए तो कम से कम बस्ती में भूचाल आ जाएगा, अभी तो घोषणा करके ही खलबली मची हुई हैं, अगर वाकई एक रुपया में अल्टासाउंड और एक्सरे होने लगेंगे तो मिश्राजी रातों रात मरीजों के भगवान बन जाएगें। वैसे देखा जाए जो गरीब मरीजों के इस तरह की योजना जरुरी भी था, क्यों कि जिस तरह प्राइवेट वाले गरीब मरीजों का उत्पीड़न कर रहे हैं, और गलत रिपोर्ट दे रहे हैं, उससे मरीजों को मुक्ति मिल जाएगी। सबसे अधिक अच्छी यह होगी कि मरीजों को प्रशिक्षित लोगों के द्वारा ही रिपोर्ट मिलेगी। ‘पहल’ के ‘पहल’ एसके नोडल डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी की अवैध कमाई पर जबरदस्त हथौड़ा पड़ेगा। एक तरह सीएमओ और उनकी काली कमाई बंद सी हो जाएगी, तब यह लोग प्रत्येक सेंटरों से पांच हजार महीना नहीं ले पाएगें। अनेक लोगों का कहना है, कि जिस तरह यह संस्था पैसे की बरसात कर रही है, और ऐसी-ऐसी योजना की घोषणा कर रही है, जिसे पूरा करना किसी भी संस्था के लिए आसान नहीं होता। इनके फंडिगं पर भी सवाल उठ रहे हैं, और यह कहा जा रहा है, कि महिला समूहों के उत्थान के लिए जो कार्य सरकार अपनी योजनाओं के जरिए कर रही है, वह कोई संस्था नहीं कर सकती, अगर कोई करती है, तो उसे महिलाओं का वोट बैंक नजर आता है। जिले भर में यह चर्चा हैं, कि जिस तरह पहल पैसा बांट रही है, उससे चुनाव लड़ने के आसार नजर आ रहे है। ऐसे लोग भी जो पहल के पहल की सराहना कर रहे हैं, और कह रहे हैं, कि चलो कोई तो हैं, जो एक रुपया में अल्टा साउंड और एक्सरे करने की बात कह रहा है। फंडिगं को लेकर सबसे मन में सवाल उठ रहा है। हर कोई चाहना है, कि आखिर इतना पैसा किस लिए खर्चा किया जा रहा है, इसके पीछे सिर्फ महिलाओं का उत्थान करना तो नहीं हो सकता है।