गढ़मुक्तेश्वर, जनपद हापुड़।
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही सरकारी दफ्तरों को हाईटेक और व्यवस्थित करने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हापुड़ जिले की गढ़मुक्तेश्वर तहसील में बारिश ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। तहसील परिसर के फर्स्ट फ्लोर से लेकर थर्ड फ्लोर तक बने सभी सरकारी कार्यालयों की छतों से पानी टपक रहा है, जिससे कार्यालय तालाब में तब्दील हो गए हैं।
रजिस्ट्री ऑफिस की सबसे बुरी हालत
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सबसे दयनीय स्थिति रजिस्ट्री ऑफिस और उससे जुड़े रिकॉर्ड रूम की है। यहां छत से लगातार पानी टपक रहा है। कमरे में रखा प्रदेश भर के लोगों का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भीग रहा है। आलम यह है कि कर्मचारियों को रिकॉर्ड को भीगने से बचाने के लिए उसके ऊपर पॉलीथीन डालनी पड़ी है। अगर यही हाल रहा तो वर्षों पुराना रिकॉर्ड गलकर नष्ट हो सकता है।
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सभी विभागों का एक जैसा रहा
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सिर्फ रजिस्ट्री ऑफिस ही नहीं, बल्कि तहसील के लगभग सभी विभागों का यही हाल है। ए आर ओ कार्यालय, एच पी डी ए विभाग, चकबंदी विभाग, बंदोबस्त विभाग और सर्वे विभाग के कार्यालयों में भी छतों से पानी टपक रहा है।
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चकबंदी विभाग की स्थिति तो और भी गंभीर है। चकबंदी अधिकारी अंग राज सिंह का ऑफिस है, उसी कमरे में महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी रखा हुआ है और वहीं पर छत से पानी टपक रहा है। हैरानी की बात यह है कि जब कार्यालय इस हालत में है तो सीओ अंग राज सिंह कार्यालय से ही गायब हैं।
100 कर्मचारियों के बाद भी बदहाल
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तहसील परिसर में लगभग 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी रोजाना काम करते हैं। सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में स्टाफ होने के बावजूद वे अपने ही कार्यालय और सरकारी रिकॉर्ड को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं तो आम जनता के काम कैसे करेंगे?
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गढ़मुक्तेश्वर रजिस्ट्री ऑफिस में सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों के लोगों के भी जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं। जब सरकारी रिकॉर्ड ही सुरक्षित नहीं है तो आम लोगों के भविष्य का क्या होगा।
जिम्मेदार कौन?
तहसील में पानी टपकने से अगर किसी का बैनामा, खतौनी या अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गल जाता है या खराब हो जाता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन इस लापरवाही का संज्ञान लेगा? स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से इस मामले की जांच कराकर तहसील भवन की मरम्मत और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की है।
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