अवैध प्लाटिंग की खबर पढ़ जागरूक हुई महिला, स्टांप लिखने के बाद भी रोक दी जमीन की रजिस्ट्री

बस्ती/रुधौली। आप लोगों को सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है, कि जो काम खबर ने कर दिया, वह काम विज्ञापन पर हजारों खर्च करने के बाद भी नहीं हुआ। एक दिन पहले ‘अवैध प्लाटिगं में फंसे भाजपा नेता गिल्लम चौधरी’ नामक शीर्षक से खबर प्रकाषित हुई। जिसमें अवैध प्लाटिगं करने और प्लाट को खरीदने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की चेतावनी बीडीए के सचिव कीर्ति प्रकाश भारती की ओर से विज्ञापन निकाला गया, विज्ञापन हर बड़े छोटे अखबार में प्रकाशित हुआ, जिस पर बीडीए का हजारों रुपया लगा, खासबात यह है, कि विज्ञापन निकले लगभग तीन दिन हो गए, लेकिन इस विज्ञापन को किसी ने संज्ञान में नहीं लिया, सज्ञांन में उस खबर को लिया गया, जिसमें अव्ैध प्लाटिगं करने और क्रय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई। इस खबर को रुधौली की एक पंचायत सहायक ने 29 जुलाई 26 को पढ़ा, इसी दिन वह प्लाट खरीदने जा रही थी, स्टांप पेपर वगैरह सभी तैयार हो चुका था, लेकिन महिला और उसके परिवार ने जैसे ही खबर पढ़ा, वैसे ही जमीन खरीदने का इरादा त्याग दिया, इस तरह एक खबर ने महिला का 16 लाख के साथ विधिक कार्रवाई से बचा लिया।  

बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) द्वारा अवैध प्लाटिंग के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का असर अब जमीन खरीदने वाले लोगों पर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में अवैध प्लाटिंग के मामले में भाजपा नेता गिल्लम चौधरी का नाम सामने आने और मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद कई लोग सतर्क हो गए हैं। इसका एक ताजा उदाहरण रुधौली थाना क्षेत्र के भिटिया गांव में देखने को मिला, जहां एक महिला समय रहते जागरूक हो गई और कथित रूप से अवैध प्लाटिंग के खेल में फंसने से बच गई। जानकारी के अनुसार, महिला इसी जमीन के एक हिस्से की खरीदारी करने जा रही थी। दोनों पक्षों के बीच बातचीत पूरी हो चुकी थी और स्टांप पेपर भी तैयार करा लिए गए थे। केवल खाते में धनराशि ट्रांसफर होना बाकी था, जिसके बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो जाती। लेकिन इसी दौरान अवैध प्लाटिंग से जुड़ी खबरें सामने आने लगीं, जिन्हें देखने के बाद महिला ने पूरे मामले की दोबारा जांच-पड़ताल शुरू की और फिलहाल जमीन खरीदने का निर्णय रोक दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जानकारी न मिलती तो महिला भी कथित रूप से इस पूरे मामले में एक मोहरा बन सकती थी। अब खबर सामने आने के बाद क्षेत्र के अन्य लोग भी जमीन खरीदने से पहले उसकी वैधता, नक्शा स्वीकृति, बीडीए की अनुमति और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने लगे हैं। गौरतलब है कि बीडीए ने अवैध प्लाटिंग के मामलों में कई लोगों की सूची जारी की है और निर्धारित समय के भीतर वैधता सुनिश्चित न करने पर ध्वस्तीकरण सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। ऐसे में बिना जांच-पड़ताल के जमीन खरीदना भविष्य में खरीदारों के लिए आर्थिक और कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। क्षेत्र में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अवैध प्लाटिंग की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं, तो संबंधित के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं जिम्मेदारों ने की। लोगों का कहना है कि केवल नाम सार्वजनिक कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले, नियमों की अनदेखी करने वाले और यदि किसी स्तर पर मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।