बस्ती। जिस भी दल के मुखिया ने एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह को कम आंकने की कोषिष की या फिर इन्हें अपमानित किया, उसे उसकी कीमत चुकानी पड़ी, भले ही चाहें इन्हें योगीजी के कार्यक्रम में विनोद राय ने कम आंका और अपमानित किया हो। इन्होंने कभी न तो मान सम्मान और न कभी पीड़ितों को न्याय दिलाने के मामले में समझौता किया, और जब भी इन्हें अपमानित किया गया, इनका बगावती तेवर देखने को मिला। इनके बगावती तेवर को तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव नहीं झेल पाते थे। जब कि यह सपा के एमएलसी रहे। जो बगावती तेवर इनका सपा में दिखाई दिया, वही बगावती तेवर भाजपा में भी दिखाई दे रहा है। अनेक सांसद और विधायक इनके बगावती तेवर देखने के बाद यह कहते हैं, कि जो हिम्मत इनमें हैं, वह हम लोगों में नहीं है। जाहिर सी बात हैं, कि अपनी पार्टी के सीएम के खिलाफ बगावत करना हर किसी नेता के बस की बात नही है। नेताजी को हर बार जीताने में अहम भूमिका निभाने वाले इनकी जांबाज टीम के लोगों का कहना है, कि जिस दिन नेताजी का अपमान हुआ, उसी दिन नेताजी ने हम सभी को यह संदेश दिया था, कि आप लोग इस चुनाव को ठीक उसी तरह संचालित करें, जिस तरह हमारे चुनाव में करते थे, टीम के सदस्यों को स्पष्ट निर्देष दिया गया था, कि यह लड़ाई अपमान की है। 23 अक्टूबर 26 को शिक्षक एमएलसी चुनाव में ठीक उसी तरह नेताजी के टीम को मेहनत करते देखा गया, जैसा कि उनके चुनाव में देखने को मिलता था। यह सही है, कि अगर नेताजी जैसी टीम को अन्य नेताओं को मिल जाए तो जीत आसान हो जाएगी। तब हारा हुआ चुनाव भी जीता जा सकता है, नेताजी के रिकार्ड मतों से जीतने का राज उनकी टीम के सदस्यसें की मेहनत और उनकी ईमानदारी रही है। इसी लिए दावा किया जा रहा है, कि 23 अक्टूबर 26 को हुए चुनाव में परिणाम सपा के संजयन त्रिपाठी के पक्ष में होता हुआ अभी से दिखाई दे रहा है, क्यों कि इस चुनाव की बागडोर नेताजी के टीम के हाथ में रहा। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि नेताजी की अपील पर भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं ने संजयन त्रिपाठी के पक्ष में वोट करने के लिए अपनी ताकत लगा दी। इसे आप भीतरघात और योगीजी के प्रति उनके ही लोगों के द्वारा गुस्सा और नाराजगी भी कहा जा सकता है। हालांकि गोरखपुर की इस प्रतिष्ठित सीट को जीतने और भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी को जीताने के लिए पूरी प्रशासनिक टीम लगी हुई थी। उसके बाद भी वह परिणाम देखने को नहीं मिला, जिसकी संभावना की जा रही थी। योगीजी और पकंजजी सोच नहीं सकते कि भाजपा प्रत्याशी को हराने और सपा प्रत्याशी को जीताने के लिए उनके ही बड़े-बड़े नेताओं ने भीतरघात किया, और जिस भाजपा प्रत्याशी को हराने के लिए भाजपा के लोग ही लगे हों, तो वह कैसे जीत सकता है? जिस तरह विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में भीतरघात देखने को मिला और जिसके चलते भाजपा को एक सांसद और चार विधायक से हाथ घोना पड़ा, वही कहानी शिक्षक एमएलसी के चुनाव में दोहराई गई। हालांकि इसका परिणाम 27 को पता चलेगा, लेकिन संजयन त्रिपाठी के खेमे में अभी से जीत की चर्चा होने लगी, और कहा जाने लगा कि अगर संजयन त्रिपाठी के सिर पर पहली बार एमएलसी का ताज सजेगा तो उसका सारा श्रेय भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह को जाएगा। अगर वाकई गोरखपुर की इस सीट को भाजपा गवां देती है, तो इसका प्रभाव 2027 के चुनाव में पड़ सकता हैं, यह चुनाव संजयन त्रिपाठी बनाम भाजपा के धु्रव त्रिपाठी का न होकर योगीजी बनाम देवेंद्र प्रताप सिंह का माना जा रहा है। योगीजी के घर में अगर भाजपा हारती है, तो इसे योगीजी की भी हार मानी जाएगी। एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कहा कि उन्हें मतगणना के दौरान गड़बड़ी करने की आशंका हैं, और इसी लिए एक ऐसे अधिकारी को चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया, जिस पर पहले से कई आरोप है। स्पष्ट कहा कि भाजपा वाले अपने प्रत्याशी को जीताने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। कहा कि इसकी जानकारी चुनाव आयोग सहित अन्य को दे दी गई है। जोर देकर कहा कि सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी चुनाव जीत रहे हैं, और वह प्रथम वरीयता के आधार पर चुनाव जीत जाएगा, अगर कोई गड़बड़ी नहीं हुई।