हापुड: के जिलाध्यक्ष अनवार मलिक के नेतृत्व में आज "आम आदमी पार्टी जिला ईकाई हापुड ने "मोदी-ट्रंप ट्रेड डील" को तत्काल निरस्त करने एवं देश के किसानों, एवम् आम नागरिकों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर माननीय राष्ट्रपति "भारत सरकार' को सम्बोधित ग्यापन, एस डी एम हापुड,को सोंपा!!
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अनवार मलिक ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ की गई ट्रेड डील को लेकर देशभर में गहरी चिंता और व्यापक आशंकाएँ व्याप्त हैं। ट्रेड डील की शर्तों, संभावित लाभार्थियों और दूरगामी प्रभावों को लेकर न तो संसद को विश्वास में लिया गया है और न ही देश की जनता के समक्ष पूर्ण पारदर्शिता बरती गई है।!
"जिला प्रवक्ता एडवोकेट ऋषिपाल सैनी" ने कहा कि,

यह तथ्य सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय उद्योग "अडानी समूह " के विरुद्ध जांच, समन और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित कार्यवाहियाँ चल रही हैं, ऐसे समय में जब देश के प्रमुख उद्योगपति अडानी को अमेरिका में समन जारी हो चुके हैं इस डील को लेकर तरह तरह की अटकले और संदेह व्यक्त किये जा रहे हैं !
"जिला प्रभारी डा0 नरेन्द्र सोलंकि" ने कहा कि "एप्स्टीन प्रकरण" में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने जैसी घटनाएँ सामने आई हैं, तब मोदी-ट्रंप ट्रेड डील का समय तथा संवेदनशीलता और इसके पीछे की प्राथमिकताओं पर प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं।
"जिला उपाध्यक्ष जोगेन्द्र दास" ने कहा कि,
देश यह अभी भूला नहीं है कि राफेल सौदे के दौरान अनिल अंबानी की,महज़ 12 दिन पुरानी कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाए जाने को लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस और गंभीर प्रश्न उठे थे, उस समय भी यह आरोप लगा था कि सरकारी नीतिगत निर्णयों से चुनिंदा कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाया गया है, आज जब मोदी-ट्रंप ट्रेड डील सामने आई है, तो यह आवश्यक है कि यह स्पष्ट किया जाए कि कहीं यह डील भी किसी विशेष उद्योग समूह को लाभ पहुंचाने की मंशा से तो नहीं की गई।
ज्ञापन में मोदी सरकार पर आरोप लगाया गया कि उसने देश के करोड़ों किसानों के हितों को अमेरिका के सामने गिरवी रख दिया है, क्योंकि इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाएगा जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 0 जीरो प्रतिशत टैक्स वसूलेगा, और सबसे गंभीर बात यह है कि भारत का कृषि बाजार अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया गया है, जिन्हें वहां लगभग 80 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है; ऐसे में भारतीय किसान ऐसी किसी सब्सिडी के अभाव में उनसे कैसे प्रतिस्पर्धा करेगा! आलोचकों का कहना है कि इस डील में कुछ चुनिंदा वस्तुओं के साथ “और अन्य उत्पाद” जैसे शब्द जोड़कर भविष्य में और अधिक क्षेत्रों को खोलने की गुंजाइश रखी गई है, जिससे देश की आर्थिक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
किसानों, एमएसएमई, छोटे व्यापारियों, युवाओं और मध्यम वर्ग पर इस ट्रेड डील का क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर कोई विस्तृत श्वेत पत्र या संसदीय चर्चा अब तक सामने नहीं आई है। यदि यह डील भारतीय बाजार को असंतुलित तरीके से विदेशी हितों के लिए खोलती है, तो इसका सीधा दुष्प्रभाव कृषि, रोजगार और स्थानीय उद्योगों पर पड़ेगा। यह केवल आर्थिक समझौता नहीं बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और कृषि संरचना पर सीधा प्रहार है। इससे छोटे किसानों की आय पर असर पड़ेगा, स्थानीय बाजार विदेशी कंपनियों के लिए खोले जाएंगे और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा! इस अवसर पर,पं0 उदयवीर शर्मा, चौ0ब्रहमपाल, मनोज गुप्ता,बिजे्द्र, रोहताश,हीरालाल जैनवाल, अरुण शर्मा, आजाद, टीकाराम उपाध्याय, आदि थे!
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