बस्ती। एक तरफ पूरे विष्व में पर्यावरण और हरियाली की सुरक्षा को लेकर अभियान चल रहा है, और वहीं दूसरी ओर सरकारी वन विहार की हरियाली को मिल के राख के जरिए समाप्त की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है, कि जब चोरी छिपे मिल वाले सरकारी बाग में राख गिराकर हरियाली को नष्ट कर रहे हैं, तो पर्यावरण और हरे भरे बाग की सुरक्षा कैसे होगी? हरियाली की सुरक्षा रखने की जिम्मेदारी न सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि उन मिलों और समाज की है, जिनके चलते पर्यावरण का खतरा उत्पन्न हो रहा है।  

इसे लेकर नामित सदस्य जिला पर्यावरण समिति उ.प्र. सुधीर पटेल उर्फ राहुल ने डीएम/अध्यक्ष पर्यावरण समिति को पत्र लिखकर बिना अनुमति और बिना वैज्ञानिक परीक्षण के सरकारी बाग को प्राइवेट मिल के द्वारा राख डालने की जानकारी देते हुए, तत्काल प्रभाव से रोकने और दोशी व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। लिखा कि उक्त राख का अब तक कोई वैज्ञानिक परीक्षण नहीं करवाया गया, जिससे यह पता चल सके कि इसमें हानिकारक रसायनिक तत्व है, या भारी धातुएं मौजूद है। कहा कि औधोगिक अपविष्ट का निस्तारण मानकों के अनुसार होना चाहिए, न कि किसी सरकारी बाग में। लिखा कि इतना घना एवं सुंदर सरकारी बाग जिले की हरित संपत्ति है। जहां इस पगकार की राख डालना मिटटी की उर्वरता, पेड़ की हरियाली, पेड़ पौधों तथा जैव विधिता के लिए खतरा बन सकता है। कहा कि यह जांच का विषय हैं, कि किसके संरक्षण में इतनी मात्रा में मिल की राख सरकारी बाग में डाली जा रही है। लिखा कि राख के चलते आसपास के क्षेत्र में मिटटी, जल एवं वायु प्रदूषण फैलने की संभावना रहती है। इससे स्थानीय लोगों के सेहत पर भी प्रभाव पड़ रहा है, आंख में राख जाने से आंख के खराब होने की संभावना बनी रहती है। कहा कि इसकी तत्काल उच्च स्तरीय जांच करवाकर कार्रवाई की जाए, ताकि हरियाली को मिल के राख से बचाया जा सके।