बस्ती। जिस हिसाब जिले में धोखाधड़ी और ठगी के शिकार लोग हो रहे हैं, उसे देखते हुए लोगों को आवष्यकता से अधिक सावधान होने की जरुरत है। जरा सा भी असावधानी हुई, समझो जीवनभर की पूजीं हाथ से चली जाएगी। फिर रोने और अफसोस करने के आलावा और कुछ हाथ में नहीं आएगा। कोई ऐसा दिन नहीं जाता, जब धोखाधड़ी और ठगी के दो-चार एफआईआर न होते है। पुलिस और साइबर सेल के सामने इस तरह के इतने सारे मामले सामने आते हैं, कि उसका निस्तारण नहीं हो रहा है। अभी भी हमारा साइबर सेल इतना संसाधानों से मजबूत नहीं हैं, कि एक निष्चित समय में फ्राड करने वालों को दबोच सके। जब तक फ्राड पकड़ में आता है, तब तक पैसों का व्यारा-न्यारा हो जाता है। इस तरह के क्राइम करने वाले इतने चालाक और शातिर होते हैं, कि अगर उन्हें एक-दो घंटा भी मिल गया तो करोड़ों कहां गए साइबर सेल के पकड़ना आसान नहीं होता। घर बैठे करोड़ों कमाने का इससे अधिक आसान तरीका साइबर क्राइम करने वालों को नहीं मिलता, बस उन्हें थोड़ा दिमाग लगाना पड़ता। इन लोगों के ठगी करने के इतने तरीके होते हैं, उतना साइबर सेल के पास पकड़ने के नहीं होते। अब तो ठगी करने वाले व्यपारियों को ही सबसे अधिक अपना निशाना बना रहे हैं, क्यों कि इन्हें अच्छी तरह मालूम हैं, अगर इन्होंने एक कारोबारी को शिकार बना लिया तो समझो 20-25 गांव वालों को बना लिया। गांव वालों को तो हजारों में ठगते हैं, लेकिन कारोबारियों को तो लाखों और कभी-कभी तो करोड़ में भी हाथ साफ कर लेतें है। इन्हें अच्छी तरह मालूम रहता है, कि कारोबारी का लेन-देन सबसे अधिक मार्च के माह में ही होता है। कंपनियों का टारटेट भी मार्च में ही पूरा करना होता है, इसका यह खूब फायदा उठाते हैं, वरना कटरा का एक मेडिकल स्टोर की एजेंसी 25 लाख के ठगी का शिकार न होती। राधेष्याम शुक्ल पुत्र श्रीकांत शुक्ल की ओर से दर्ज कराए मुकदमें में कहा गया कि दिन में बैंक से बैलेन्स मैसेज आया उसके बाद बैंक से दोबारा मैसेज आया कि ड्रावर का सिग्नेचर डिफर है, मैसेज आने के बाद पता चला कि फर्म का चेक स0 175 को किसी अज्ञात व्यक्ति ने फर्म से चोरी कर लिया है, जिसपर कुटरचित तरीके से हस्ताक्षर बनाकर 25 लाख का भुगतान कर लिया। पुलिस और साइबर सेल की ओर से जगह-जगह जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, और उन्हें बताया जाता कि जब कोई मैसेज आए तो उन्हें क्या करना होता है। यह भी बताया जाता है, कि अधिकतर मैसेज लालच वाला आता है, जिसमें आसानी से ग्रामीण क्षेत्र के लोग फंस जाते है। बहुत कम ऐसे भाग्यशाली होते हैं, जिनका पैसा वापस मिल जाता, खोया या चुराया हुआ मोबाइल तो मिल जाता है, गया हुआ लेकिन लाखों नहीं मिलता। ऐसे मौके पर बैंक वाले भी हाथ खड़ा करन देते थे, पहले एटीएम के जरिए ठगी होती थी, लेकिन अब तो मैसेज के जरिए ठगी का कारोबार हो रहा है।
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