दिल्ली में 11 मार्च को आयोजित होने वाले महिला पंचायत प्रतिनिधियों के एक दिवसीय राष्टीय सम्मेलन में भाग लेने वाली यूपी के 135 महिला प्रधानों में डेल्हवा की गीता वर्मा का भी नाम शामिल
-इनको यह सम्मान अपने ग्राम पंचायत में उल्लेखनीय काम करने के लिए मिला, इन्होंने 56 चकमार्गो को अकितक्रमण से मुक्त करवाया, सात मार्गो का इंटरलाकिगं करवाया, 10 आरसीसी सड़कों का निर्माण करवाया, पंचायत भवन, सामुदायिक षौेचालय, पानी की टंकी, अन्नपूर्णा भवन, आरआरसी सेंटर, प्राथमिक और जूनियर स्कूलों का बाउंडीवाल करवाया, 35 सोलर लाइट और 70 स्टीट लाइट लगवाया
बस्ती। भले ही कुदरहा ब्लॉक के प्रमुख को वह सम्मान नहीं मिला जो डेल्हवा की प्रधान गीता वर्मा को मिला। यह सिर्फ कुदरहा ब्लॉक ही नहीं बल्कि जिले की महिला प्रधानों में एक माडल बनकर उभरी है। इनका नाम प्रदेश की उन 135 महिला प्रधानों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी ईमानदारी और मेहनत से अपने ग्राम पंचायतों को सजाया संवारा। यह गीता वर्मा और जिले के लिए बहुत सम्मान की बात है। जिले के लोग डेल्हवा जैसी महिला प्रधान की तरह अन्य प्रधानों से भी अपेक्षा रखते है। गीता वर्मा सहित 135 महिला प्रधानों को सम्मानित भी किया जाएगा। इन्हें सम्मेलन में यह भी बताना होगा कि इन्होंने किस तरह गांव का विकास किया। इनकी जो उपलब्धि रही है, और जिसके चलते इन्हें सम्मान मिला, उनमें इनके द्वारा ग्राम पंचायत में किए गए उल्लेखनीय काम शामिल हैं, जिसमें 56 चकमार्गो को अतिक्रमण से मुक्त करवाना, सात मार्गो का इंटरलाकिगं करवाना, 10 आरसीसी सड़कों का निर्माण करवाना, पंचायत भवन, सामुदायिक शोचालय, पानी की टंकी, अन्नपूर्णा भवन, आरआरसी सेंटर, प्राथमिक और जूनियर स्कूलों का बाउंडीवाल का निर्माण करवाना, 35 सोलर लाइट और 70 स्टीट लाइट लगवाना षामिल है। इसके अतिरिक्त विधवा एवं वृद्वा पेंषन और आवास दिलवाने में महत्वपूर्ण योदान रहा। इनके पति सेना में है। गांव के लोग इनके कार्य और व्यवहार प्रसन्न है। सुख-दुख में शामिल होना, और पीड़ितों के लिए लड़ने की जो जज्बा है, उसी के चलते इन्हें लोग सबसे अलग मानते हैं, आज के दौर में जहां अनेक महिला/पुरुष प्रधान फारचूनर जैसे मंहगी वाहनों में चलती/चल रहे हैं, वहीं इनके पास वही पुरानी स्कूटी है। गांव और गांव वालों के विकास के लिए इनकी मुख्यालय आना जाना रहता है। सरकार को यह काम दो-तीन साल पहले कर देना चाहिए था, ताकि अधिक से अधिक महिला प्रधानों को सम्मान पाने का मौका मिल जाता।
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