बस्ती। वाल्टरगंज चीनी मिल कर्मचारी संघ, बस्ती के बैनर तले नियमित व मौसमी कर्मचारियों का बकाया वेतन और मिल के पुनरुद्धार की मांग को लेकर चल रहा विशाल धरना आज 313वें दिन भी अनवरत जारी रहा। “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों के बीच सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी व महिलाएं भीषण गर्मी में मिल गेट पर डटे रहे।

’धरने की स्थिति’

धरनारत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि 317 दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन व मिल प्रबंधन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। कई बार ज्ञापन, प्रेस विज्ञप्ति व वार्ता के बाद भी बकाया वेतन, बोनस, ग्रेच्युटी व रिटेनर का भुगतान नहीं किया गया। क्षेत्र के गन्ना किसानों का मूल्य भी वर्षों से बकाया है।

आज धरने के दौरान “मिल प्रशासन मुर्दाबाद”, “जिला प्रशासन होश में आओ”, “बकाया दो मिल चलाओ” के नारे लगाए गए। वक्ताओं ने कहा कि 317 दिन से खुले आसमान के नीचे बैठे मजदूर परिवार भुखमरी की कगार पर हैं।

’कर्मचारी संघ के आरोप’

1. मिल प्रबंधन जानबूझकर कर्मचारियों को आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।

2. मिल की संपत्ति व कबाड़ को चोरी-छिपे बेचने का आरोप है, जबकि मजदूरों का वेतन बकाया है।

3. 317 दिन से शांतिपूर्ण धरने के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल न करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

’प्रमुख मांगें’

1. समस्त नियमित व मौसमी कर्मचारियों का बकाया वेतन, बोनस, ग्रेच्युटी, रिटेनर व अन्य देयक ब्याज सहित तत्काल भुगतान किया जाए।

2. गन्ना किसानों का बकाया मूल्य ब्याज सहित एकमुश्त भुगतान किया जाए।

3. वाल्टरगंज चीनी मिल का पुनरुद्धार कर आगामी पेराई सत्र से संचालन शुरू किया जाए।

4. मिल परिसर से कथित रूप से हो रही कबाड़ चोरी की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर एफ.आई.आर. दर्ज हो।

’अल्टीमेटम’

कर्मचारी संघ ने कहा कि यदि 3 दिन के अंदर मांगें पूरी नहीं हुईं तो 317 दिन से चल रहा शांतिपूर्ण धरना बड़े आंदोलन में तब्दील होगा। रेल रोको, चक्का जाम व जिला मुख्यालय घेराव किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन व मिल प्रबंधन की होगी।

’द्वारा’

’विकास सिंह, ठाकुर चंद्रेश प्रताप सिंह, मुकेश श्रीवास्तव, सत्येन्द्र बहादुर सिंह, विष्णु राव, मनीष राजभर’