बस्ती। जिस जेडीई और निविदा लिपिक को कमिश्नर साहब ने दोषी माना, उसी को कार्रवाई करने का आदेश कर दिया, सवाल उठ रहा है, कि क्या जेडीई अपने और अपने बाबू के खिलाफ कार्रवाई कर पाएगें? इतने बड़े घोटाले में जहां कमिश्नर को जेडीई के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखना चाहिए, वहीं इन्होंने आरोपी को ही कार्रवाई करने को लिख दिया, इतना ही नहीं जिस आउटसोर्सिगं कंपनी ने जेडीई और लिपिक के साथ मिलकर फ्राड किया, उसी को भुगतान करने का आदेश कर दिया। कमिश्नर के इस आदेश का लाभ फ्राड करने वाली फर्म और जेडीई एवं लिपिक को मिला। तीनों जो चाहते थे, वही कमिष्नर साहब ने कर दिया, फिर ऐसे जांच और कार्रवाई से क्या फायदा जिसका लाभ आरोपी को ही मिले। जेडीई ने न तो लिपिक और न फर्म के खिलाफ कार्रवाई किया, अलबत्ता कमिश्नर साहब के आदेश का हवाला देते हुए, फर्म को भुगतान करने का फरमान जारी कर दिया। मीडिया चिल्लाती रही, लेकिन वही हुआ, जो जेडीई, लिपिक और फर्म चाहती थी। कमिश्नर साहब के इस आदेश को लेकर तरत-तरह के सवाल उठ रहें हैं, और कहा जा रहा है, कि ऐसा आदेश करने का क्या फायदा जिसका लाभ फ्राड करने वाली फर्म और जेडीई एवं लिपिक को मिले। कमिष्नर साहब का यह आदेश हंसी का पात्र बन कर रह गया। संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में आउंटसोर्सिगं के नाम पर बहुत बड़ा खेल का खुलासा तो कमिश्नर साहब जांच करवा कर कर दिया, लेकिन जो कार्रवाई होनी या फिर करवानी चाहिए थी, वह नहीं करवा पाए। जिसका नतीजा फ्राड करने वाली खुशियां मना रहे है, और शिकायत करने वाला अफसोस कर रहा है, कि क्यों उसने कमिश्नर से शिकायत कर दिया। जांच कमेटी ने भी इसके लिए जेडीई को ही जिम्मेदार माना। जांच टीम द्वारा दिनांक 18 फरवरी को मुख्य कोषाधिकारी बस्ती संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा बस्ती मंडल के साथ शिकायतकर्ता की शिकायत को सुनते हुए जांच की गई है।
बता दें कि इस संबंध में जांच समिति द्वारा पत्र संख्या 825 दिनांक 19 मार्च 2026 के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। जांच टीम ने पहली नजर में गड़बड़ी निकाली। स्पष्ट कहा गया कि बिड में शिकायत करता के साथ-साथ अन्य फर्म अंतिम रूप से प्रचलित बिड के शर्तों के अनुसार तकनीकी रूप से योग्य नहीं पाई गई। निविदा में कई बिंदुओं पर अनियमितता किये जाने की पुष्टि हुई। जिससे स्पष्ट पता चल रहा है कि जो निविदा विभाग द्वारा आमंत्रित की गई थी उसमें पारदर्शिता नहीं बरती गई है। इसलिए कमिश्नर ने संयुक्त शिक्षा निदेशक बस्ती मंडल को यह निर्देशित किया है कि पूर्व में की गई निविदा को निरस्त करते हुए दोबारा फिर नियमानुसार निविदा आमंत्रित करते हुए अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित कराये और इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए हैं कि दोषी के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कृत कार्रवाई से उन्हें भी अवगत कराया जाए। यहां तक तो कमिश्नर साहब की कार्रवाई की सराहना हुई, लेकिन उसके बाद जो हुआ, उससे कमिश्नर की कार्रवाई पर सवाल खड़ा कर दिया। जेडीई ने महिश इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को भुगतान करने का आदेश दे दिया। अब यह सवाल उठ रहा है, कि क्या जेडीई खुद और लिपिक सहित फर्म के खिलाफ कार्रवाई कर पाएगें, अगर कमिश्नर साहब की ओर से यही पत्र शासन को लिखा गया होता तो तीनों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती हैं, लेकिन जिस फर्म से भारी कमीषन लिया गया, क्या उस फर्म और लिपिक के खिलाफ जेडीई कार्रवाई कर पाएगें, इससे बड़ा सवाल यह है, कि आखिर जेडीई के खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा? जेडीई तो खुद अपने खिलाफ कार्रवाई कर नहीं सकते तो फिर कौन करेगा?
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