बस्ती। अगर कोई उलट-पुलट नहीं हुआ, जिसकी संभावना कम है, तो भाजपा के अमृत वर्मा के सिर पर भाजपा जिला महांमत्री का ताज सजने वाला है, इसकी तैयारी भी हो चुकी हैं, एक दो दिन में इसकी घोषणा होने की संभावना जताई जा रही हैं। वैसे नाम तो अन्य लोगों की भी चल रही है। लेकिन वर्माजी के आगे नामों की चर्चा फीकी पड़ जा रही है। वर्माजी के सिर पर यह ताज राम चरन चौधरी के सिर से उतारकर पहनाए जाने की पूरी संभावना है। वैसे भी वर्माजी महामंत्री का कामकाज देख ही रहे है। कहा भी जाता है, कि जिसके सिर पर पूर्व सांसद और वर्तमान जिलाध्यक्ष का हाथ हो, उसे महामंत्री बनने से कौन रोक सकता है। वैसे भी संगठन में जिलाध्यक्ष और महामंत्री का पद ही महत्वपूर्ण होता है। पार्टी इन्हीं दोनों के इर्द गिर्द घुमती रहती है। उपाध्यक्ष कौन होगा और अन्य पदाधिकारी कौन होगें, इसकी चर्चा कम होती है, चर्चा तो महामंत्री पद के लिए हो रही है। वैसे भी जिलाध्यक्ष और भावी महामंत्री के बीच ट्यूनिगं भी बहुत अच्छी है। यह दोनों और पार्टी के अन्य संभावित पदाधिकारी मिलकर पार्टी को कितना गति दे पाएगें यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन सबसे बड़ी परीक्षा 2027 और पंचायत चुनाव में होगा। इससे बड़ी जिम्मेदारी रीढ़विहीन हो चुके असख्ंय कार्यकर्त्ताओं को सहेजना होगा। अगर नई पदाधिकारियों की टीम कार्यकर्त्ताओं को सहेजने में सफल हुई, तो 2027 और पंचायत चुनाव में भाजपा का परचम लहराता दिखाई दे सकता है। वैसे कार्यकर्त्ताओं को सहेजना इतना आसान नहीं होगा, क्यों कि जिन लोगों की जिम्मेदारी सहेजने की है, उन्हीं लोगों के कारण कार्यकर्त्ता रीढ़विहीन हो चुके है, और जब किसी भी पार्टी के कार्यकर्त्ताओं को उसका हक और सम्मान नहीं मिलता तो परिणाम नकारात्मक होता है। जिस तरह पिछले कुछ दिनों से कार्यकर्त्ता पार्टी के पदाधिकारियों से नाराज चल रहे हैं, उसे देखकर नहीं लगता कि कार्यकर्त्ता पार्टी और पार्टी के प्रत्याषी के लिए चुनाव में जीजान लगा पाएगें। खाटी कार्यकर्त्ताओं के स्थान पर जिस तरह पार्टी के विरोधियों और आयातित एवं गांजा-स्मैक तस्करों को लाभान्वित किया गया, उसका जबाव तो कार्यकर्त्ताओं को देना ही होगा।