बस्ती। ऐसा लगता है, कि मानो अनूप खरे का परिवार और कोर्ट कचहरी का पुराना रिष्ता है। तभी तो कोर्ट इनके खिलाफ कभी एनबीडब्लू जारी करती है, तो कभी तलब करती है, तो कभी समन जारी करती। नमन श्रीवास्तव बनाम अनूप खरे के तीन मामलों में एक साथ न्यायिक मजिस्टेट/पंचम अतिरिक्त सिविल जज, जू.डि. सत्यभामा कौशिक ने अलग-अलग आदेश के जरिए कोर्ट में तलब होने का फरमान सुनाया है। यह आदेश अभियुक्त अनूप खरे को ‘दी हैरिटेज लान एंड हवाई अडडा रेस्टोरेंट के प्रोपराइट’ की क्षमता में धारा-138 के तहत जारी किया गया। यह आदेश 23 मई 26 को जारी हुआ, और अनूप खरे को 23 जून 26 को पेश होना है। यह तलबी दस-दस लाख के तीन चेक बाउंस होने पर की गई। तीन मामले में तो यह दो दिन पहले तलब किए जा चुके हैं, अभी 17 लाख के दो चेक बाउंस होने का मामला लंबित हैं। कभी भी इसमें आदेष जारी हो सकता है। विभिन्न तिथियों में 47 लाख के कुल पांच चेक अनूप खरे की ओर से नमन श्रीवास्तव को उनके बकाए के एवज में दिए गए और पांचों चेक बाउंस हो चुके है। इसी को लेकर नमन श्रीवास्तव की ओर से न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया। जिन तीन मामलों में अनूप खरे तलब हुए हैं, उनमें इनके अधिवक्ता और कोर्ट के बीच बहस और सुनवाई के बाद जारी हुआ। इससे पहले ‘कृष्ण कुमार सिंह बनाम अनूप खरे’ और ‘भाभी दिप्ती खरे और कृष्ण कुमार सिंह बनाम दिव्याषुं खरे’ के मामले में सीजेएम के यहां से अनूप खरे और दिप्ती खरे के खिलाफ एनबीडब्लूडी जारी हो चुका है। यहां पर भी लगभग 40 लाख के दो चेक के बाउंस होने के कारण मामला न्यायालय पहुंचा। केडीसी कालेज के सामने ‘मार्बल वाले अवनीश कुमार पांडेय उर्फ बंटी बनाम दिप्ती खरे’ के मामले में सात लाख का चेक बाउंस हो जाने के कारण न्यायालय की ओर से अनूप खरे की भाभी को समन जारी हो चुका है। चेक बाउंस होने के मामले में छह माह से लेकर तीन साल के कारावास का प्राविधान है। अनूप खरे, दिप्ती खरे और दिव्याषुं खरे के खिलाफ जितने भी मामलों में न्यायालय की ओर प्रारंिभक कार्रवाई की गई, वे सभी चेक बाउंस होने के कारण हुई। नमन श्रीवास्तव के मामले में तो बैंक से जानबूझकर भुगतान को रोकवाया गया। हैरान करने वाली बात यह है, कि सात चेक बाउंस होने के बाद भी एक भी चेक का भुगतान नहीं किया गया। लगता है, कि इस परिवार को इस बात का एहसास नहीं हैं, कि चेक बाउंस कराकर इन्होंने कानून की नजर में अपराध किया। जब कि इस परिवार को ही नहीं सबको मालूम हैं, कि चेक बाउंस होने का कितना बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, जेल तक जा सकते। एक तरफ इस परिवार का चेक बाउंस हो रहा है, और दूसरी तरफ परिवार 80 लाख का मकान खरीद रहा है। वह भी ऐसा मकान जो आठ-नौ साल से कोई खरीद नहीं रहा था।

दाखिल परिवाद के अनुसार विपक्षी यानि अनूप खरे और परिवादी यानि नमन श्रीवास्तव की पत्नी शिवांगी श्रीवास्तवा के सगे मामा है। दोनों परिवारों में मधुर संबध रहे। अनूप खरे के भतीजे दिव्याषुं खरे पुत्र आशीश खरे जो विपक्षी के भतीजा हैं, और व्यापार की देखरेख भी करते है। अनूप खरे ने अपने भतीजे के जरिए कभी ‘एमएलसी चुनाव’ के नाम पर तो कभी सरकारी ‘टेंडर’ भरने के नाम पर तो कभी ‘इलाज’ के नाम पर तथा अन्य झूठे बहानों से समय-समय भारी धनराशि की मांग की थी। नमन श्रीवास्तव अपने पारिवारिक संबधों पर अटूट विष्वास करते हुए अपने खाते, अपनी पत्नी शिवांगी श्रीवास्तवा के खाते, अपने ससुर के आनंद श्रीवास्तव के खाते और अपने मित्र अनुराग कुमार पाल के व्यक्तिगत खातों से साल 2023 और 2024 के बीच कुल दो करोड़ 28 लाख 11 हजार 498 रुपया अनूप खरे और दिव्याषुं खरे के खाते, चित्रांश भारती के खाते, सीएमएस स्कूल के खाते तथ अन्य खातों में आनलाइन स्थानांतरित किया। लेकिन विपक्षी ने एक करोड़ 81 लाख 11 हजार 498 रुपया ही वापस किया। जब 47 लाख के बकाए की मांग की गई तो नीयत में खोट आ गया। दोनों ने बकाए की धनराशि वापस करने से इंकार कर दिया। इतना ही नहीं कानूनी कार्रैवाई से बचने के लिए भतीजे के द्वारा डीआईजी के यहां नमन श्रीवास्तव के खिलाफ फर्जी एवं आधारहीन शिकायत किया। कहा कि परिवादी ब्याज की मांग कर रहे है। इसके विरुद्व नमन ने साक्ष्य सहित डीआईजी के यहां 27 सितंबर 25 को आवेदन दिया। कहा गया कि सात मई 25 को अनूप खरे की पत्नी सीमा खरे और दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों के द्वारा कानून को हाथ में लेते हुए परिवादी के घर अवैध रुप से घुस गए, जहां पर उन्होंने न सिर्फ शांति एवं पारिवारिक सौहार्द को भंग किया, बल्कि परिवादी को गुंडा एवं अपहरणकर्त्ता जैसे आपत्तिजनक और अपमानजनक एवं मानिहानिकारक शब्दों से नवाजा। इतना ही नहीं घर के भीतर महिलाओं की मौजूदगी में गंभीर परिणाम भुगतने का खुलेआम धमकी दिया। जब इसकी जांच पुलिस के द्वारा की गई तो 24 अक्टूबर 25 को विपक्षी के द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार एवं झूठा पाया गया। जांच में यह भी पता चला कि नमन श्रीवास्तव की ओर से किसी प्रकार के अत्यधिक ब्याज की मांग नहीं की गई। बल्कि मूल धन की मांग की गई। जांच अधिकारी के सामने दिव्याषुं खरे ने अपनी गलती को स्वीकार किया और एक लिखित पत्र भी दिया, जिसमें 47 लाख वापस करने का वादा किया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में डीआईजी कार्यालय में जांच अधिकारी के समक्ष 24 अक्टूबर 25 विपक्षी के द्वारा हस्ताक्षरयुक्त पांच पोस्ट डेटेड चेक दिया। पहला चेक नंबर 000312 दस लाख, यह वेक जब 25 नवंबर 25 और 12 दिसंबर 25 को बैंक में डाला गया तो डिसआनर हो गया। दूसरा चेक संख्या 000313 दस लाख इस चेक को 29 दिसंबर 25 को बैंक में डाला गया तो भुगतान को रोकवा दिया। तीसरा चेक संख्यस 000314 दस लाख का दिया जब यह चेक बैंक में 25 एवं 27 जनवरी 26 को डाला गया तो इसे भी भुगतान करने से रोकवा दिया गया। चौथा चेक संख्या 00315 दस लाख और पांचवां चेक सात लाख का दिया गया, जब चौथा चेक संख्या 000315 दस लाख का बैंक में 26 फरवरी 26 को डाला गया, तो उसे भी भुगतान होने से रोक दिया गया। चेक संख्या 000312 दस लाख, चेक संख्या 000313 एवं चेक संख्या 000314 के मामले में कोर्ट ने अनूप खरे को तलब किया है। चेक बाउंस होने के बाद भी पैसा मांगते रहें, लेकिन टाल मटोल करते रहे। लीगल नोटिस भी दिया गया, लेकिन कोई जबाव नहीं दिया, तब जाकर नमन श्रीवास्तव की ओर से पांच परिवाद दाखिल किया गया, जिसमें तीन में कोर्ट ने तलब किया और दो अभी लंबित है।