बस्ती। कृषि विभाग के जो भ्रष्ट बाबू यह सोचते थे, और घंमड करते थे, कि उनका तबादला नहीं होगा, उन लोगों को इस बार उंट पहाड़ के नीचे आया। जो लोग हर बार तरह, इस बार भी चढ़ावा चढ़ाकर आए थे, उन लोगों को भी निराशा हाथ लगी, उन्हंें भी जिले से बाहर जाना पड़ा। हैरान करने वाली बात यह है, कि कोई समझ ही नहीं रहा है, कि यह सब कैसे हो गया, और इन सबके पीछे कौन है? क्यों कि जिन लोगों का तबादला हुआ, उन सभी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता रहा। यह पहला ऐसा विभाग हैं, जहां पर किसी का कोई नहीं, सब पैसे के है। इसी विभाग में सबसे अधिक षिकायतें होती है, षिकायतें और कोई नहीं बल्कि विभाग के कर्मचारी ही छदम नाम से करवातें है। यहां पर काम के लिए लड़ाई नहीं होती बल्कि मलाईदार पटल के लिए आपस में लड़ाई होती है, और मलाईदार पटल उसी को मिलता है, जो साहब को सबसे अधिक कमाकर देता है। इस विभाग में अधिक कमा कर देने वालों में कंपटीषन होता है। कहना गलत नहीं होगा कि इस कार्यालय में एक दूसरे के जितने दुष्मन है, उतने दोस्त नहीं होगें। यह लोग न सिर्फ एक दूसरे की षिकायत करवाते हैं, बल्कि निदेशालय में जाकर कार्रवाई करने के लिए पैरवी भी करते है। यहां पर एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए लाखों खर्च किए जाते है। चूंकि कमाई अंधाधुंध होती है, इस लिए बदला लेने में कोई दिक्कत नहीं होती, रही बात निदेशालय के लोगों की तो उन्हें भी इसी बहाने कमाने का मौका मिल जाता है। इस विभाग में अधिकतर तबादले शिकायत के आधार पर होते हैं, लेकिन इस बार प्रषासनिक आधार पर भी हुए। सब एक दूसरे को शक की निगाह से देखते है। आपसी लड़ाई के चलते अंदर की बाते बाहर मीडिया के पास आती है। जिनते भी भ्रष्ट बाबू हैं, सभी ने अपना-अपना नेता पाल रखा है। यहां के लोग जितना कमाई के लिए परेशान रहते हैं, अगर उसका आधा किसान हित के लिए परेशान होते तो जयजयकार होती। हर कोई अपने-अपने हिसाब से लूट खा रहा है। यह पहला ऐसा विभाग होगा, जहां पर एकता और भाईचारा नाम की कोई चीज नहीं, यह लोग हमेशा एक दूसरे को पटकनी देने में लगे रहते हैं। इसी पटकनी के चक्कर में कभी खुट पटक दिए जाते है। इस बार जो तबादला हुआ उसकी खूब चर्चा हो रही है, चर्चा इस बात की हो रही हैं, कि जो लोग अपने आप को सूरमा समझते थे, वह भी ताष के पत्ते की तरह फंेट दिए गए। एक तरह से कृषि विभाग के 80 फीसद भ्रष्ट बाबूओं का साम्राज्य इस बार समाप्त हो गया। अब देखने वाली यह होगी, कि जो लोग इनके स्थान पर आ रहे हैं, वे कितने भ्रष्ट और कितने ईमानदार होगें। वैसे आने वाले बाबूओं को विरासत में एक भ्रष्ट व्यवस्था मिली है। अगर कोई बेईमान हुआ तो उसे कुछ नहीं करना पड़ेगा, उसे एक तरह से थाली में पकवान मिल जाएगा।