‘तीन तलाक’ को अपराध बनाने वाले 2019 के कानून का बचाव करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि यह प्रथा विवाह की सामाजिक संस्था के लिए घातक है. कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि तीन तलाक न तो कानूनी है और न ही इस्लामी है. ये एक सामाजिक अपराध है.