बस्ती। जिले के सबसे अधिक व्यस्तम कहे जाने वाले ओझा डाइग्नोस्टिक सेन्टर, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल डा. एके चौधरी के भरोसे नहीं बल्कि भगवान भरोसे चल रहे है। अगर जिला अस्पताल के बगल ओझा डाइग्नोस्टिक सेन्टर में यहां पर इतनी भीड़ होती है, कि बिना किसी डाक्टर के हस्ताक्षर के रिपोर्ट थमा दिया जाता है। यहां पर अधिकाशं परीक्षण अप्रशिक्षित के जरिए होता है, क्यों कि अगर किसी डाक्टर को परीक्षण करना और रिपोर्ट तैयार करना हो तो उसके लिए 24 घंटे भी कम पड़ता है।
ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया, जिसमें अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में अल्ट्रासाउंड करने वाले किसी डॉक्टर का हस्ताक्षर न होने से मरीज गुमराह हो रहें है। देखा जाए तो ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर तीन डाक्टरों का नाम अंकित हैं, फिर भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर किसी डाक्टर का हस्ताक्षर नहीं है। मरीजों का कहना है, कि यहां पर अक्सर बिना किसी डाक्टर के हस्ताक्षर के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिया जाता है। बड़ा सवाल यह है, कि क्यों बार-बार इसी सेंटर पर फर्जी रिपोर्ट देने का मामला सामने आता है, और क्यों नहीं शिकायत पर नोडल डा. एके चौधरी इसके खिलाफ कोई करते हैं, सबसे अधिक मरीज होने के नाते सबसे अधिक चढ़ावा भी यही से चढ़ाया जाता है। बस्ती जिले में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मामले में माना जाना है ओझा डाइग्नोस्टिक सेन्टर मामला तूल पकड़ता देख मीडिया टीम को दे सफाई जहां पर मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए करना पड़ता है कई घण्टे इन्तजार, सोशल मीडिया पर खबर वायरल होते हीडॉक्टर गा रहे ईमानदारी की गाथा अल्ट्रासाउंड की फीस 900 रुपये फिर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट प्रेशित करने वाले डाक्टर का हस्ताक्षर रिपोर्ट से गायब होना जिले में बना चर्चा का विषय आखिर क्यों अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर डाक्टरों द्वारा नही किया जा रहा हस्ताक्षर जो कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की तरह कर रहा संकेत सूत्रों की माने तो अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के नाम पर ओझा डाइग्नोस्टिक सेन्टर बस्ती द्वारा मरीजो के जिन्दगी के साथ कर रहा खिलवाड़। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के नाम पर मरीजों का बड़े पैमाने पर पूरे जिले में शोषण हो रहा है।
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