बस्ती। अगर उमेश गोस्वामी जैसा ईमानदार शिकायतकर्त्ता डीएम को यह लिखकर दे कि मैडम डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी तीन-तीन लाख लेकर एक दर्जन अल्टासाउंड और पैथालाजी सेंटर को लाइसेंस देने के फिराक में हैं, और आपसे हस्ताक्षर करवाना चाहते है। शिकायतकर्त्ता ने इसकी जांच किसी मजिस्टेट से करवाने की अपील की थी, मजिस्टेट से जांच भी नहीं करवाया और हस्ताक्षर भी करके सीडीओ के पास पत्रवली को भेज दिया। जब शिकायतकर्त्ता को इसकी जानकारी हुई तो वह 11 मई 26 को फिर डीएम के पास एक लिखित शिकायत पत्र ले गए, और कहा कि मैडम में आपने बिना जांच करवाए पत्रावली पर हस्ताक्षर कर दिया। शिकायतकर्त्ता ने फिर डीएम से लिखित में कहा कि पत्रावली को वापस मंगाकर जो डाक्टर्स के अभिलेख लगाए गए हैं, उनकी विधिवत मजिस्टेेरिएल जांच करवाकर तभी उा पर विचार किया जाए और अनियमितता पाए जाने पर डिप्टी सीएमओ डा. एके चौधरी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कराई जाए। कहा कि मैडम जब जिले भर में कुल आधा दर्जन ही रेडियोलाजिस्ट हैं, तो कैसे 99 अल्टासाउंड सेंटर को लाइसेंस जारी हो गया। कहा कि मैडम इस तरह सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ने मिलकर फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी कर लगभग तीन करोड़ का बंदरवांट किया। अगर इस तरह का लाइसेंस जारी हो रहा है, तो जाहिर सी बात जो अप्रशिक्षित जांच कर रहे हैं, उनके रिपोर्ट पर भी संदेह है। कहा कि अधिकतर अल्टासाउंड वाले फर्जी रिपोर्ट दे रहे हैं, जिससे सबसे अधिक नुकसान गरीब मरीजों का हो रहा है। सवाल उठ रहा है, कि यह कैसी ऐसी व्यवस्था हैं, जिसमें अगर कोई चाहे तो फर्जी डाक्टर्स की डिग्री लगाकर और तीन लाख देकर लाइसेंस प्राप्त कर ले। बार-बार मीडिया और जनता यह सवाल उठा रही है, कि जब जिले में आधा दर्जन ही रेडियोलाजिस्ट हैं, तो कैसे लगभग सौ लाइसेंस जारी हो गया, और वह लगभग 95 कौन ऐसे अप्रशिक्षित लोग हैं, जो जांच भी कर रहे हैं, और रिपोर्ट भी दे रहे हैं, आखिर उस रिपोर्ट पर किस रेडियोलाजिस्ट के हस्ताक्षर हो रहे है? क्यों नहीं बार-बार षिकायत के बाद भी प्रशासन और सीएमओ इसकी जांच कराते? यह बहुत बड़ा सवाल बना हुआ है।
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