-जिला अस्पताल बस्ती में अर्से तक अपनी सेवा देने वाले डा. रुपेष हल्दर का तबादला उन्नाव जनपद के पीएचसी तकिया निगोही से हुआ, तो क्षेत्र के लोग विरोध-स्वरुप  धरना-प्रदर्शन करने लगे

-एक डा. हल्थर हैं, और दूसरे बस्ती के भ्रष्ट सीएमओ डा. राजीव निगम, डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी एवं डा. बृजेश शुक्ल जिनके जाने के लिए लोग भगवान से प्रार्थना कर रहें

बस्ती। प्रदेश के कितने ऐसे सरकारी डाक्टर होगें, जिनके तबादले के विरोध में क्षेत्र के लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया हो, और ऐसे कितने डाक्टर होगें, जिनके जाने पर लोगों ने उन्हें आसंूओं से बिदा किया हो। इनमें जिला अस्पताल बस्ती में अपनी सेवाओं और आचरण व्यवहार एवं ईमानदारी से लोगों का दिल जीतने वाले डा. रुपेश हल्दार हैं। इनका तबादला जब जनपद उन्नाव के पीएचसी तकिया निकोही में हुआ, तो उसके विरोध में क्षेत्र के लोग सड़क पर आकर सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने लगे, और तबादला रोकने की मांग करने। एक ईमानदार, डा. हल्दार हैं, जिनके तबादले के विरोध में धरना-प्रदर्शन हो रहा है, और एक भ्रष्ट सीएमओ डा. राजीव निगम, डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी और डाक्टर बृजेश शुक्ल हैं, जिनके तबादले के लिए लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं, और कह रहें हैं, कि कब जिले के लोगों को इन भ्रष्ट डाक्टरों से पीछा छूटेगा? जो मान-सम्मान और इज्जत डा. रुपेश हल्दार को क्षेत्र के लोगों ने दिया। वह बहुत सरकारी डाक्टरों को मिला होगा। सवाल उठ रहा है, कि क्या वह मान-सम्मान और इज्जत भ्रष्ट चौकड़ी डाक्टरों को मिल पाएगा? यह लोग जब जिले से जाएगें तो इनके जाने पर लोग रोएगें नहीं बल्कि मिठाई बाटेंगे। जिस तरह इस चौकड़ी ने जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को अपने भ्रष्ट आचरण से दागदार किया, उसे जिले की जनता कभी नहीं भूल पाएगी। जिन डाक्टरों को बेईमानी करने का चस्का लग चुका हो, और जो डाक्टर लोगों की मौत और भ्रूण हत्या का भोजन करता हो, देखा जाए तो ऐसे डाक्टरों को अपने आपको डाक्टर कहने का भी कोई हक नहीं। दिक्कत यह है, कि विभाग को भी डाक्टर हल्दार जैसा ईमानदार डाक्टर नहीं बल्कि सीएमओ डा. राजीव निगम, डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी और डाक्टर बृजेश शुक्ल जैसा डाक्टर चाहिए, जो जिले को लूटे और उसका हिस्सा उसे भी दें। आज डाक्टर हल्दार जैसे लोगों को ही मरीज भगवान कहते है। भगवान कहलाने का हक शायद सीएमओ डा. राजीव निगम, डा. एसबी सिंह, डा. एके चौधरी और डाक्टर बृजेश शुक्ल को उनके सर्विस काल में न मिल पाए। ऐसे लोगों ने कभी भगवान बनने का प्रयास भी नहीं किया। इन लोगों को जितना कोई गाली देता है, उतना यह खुश होते हैं, अगर ऐसे लोगों को किसी ने भगवान कहने का भूल कर दिया, तो इन्हें ऐसा लगता है, मानो जैसे किसी ने उन्हें गाली दे दी हो।