बस्ती। जिस प्रदेश में गरीबों को न्याय पाने के लिए जल समाधि लेने को मजबूर होना पड़े, उस राज्य की क्या हालत होगी? इसे लोग आसानी से समझ सकते है। क्या किसी ने यह सोचा कर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाई थी, कि एक दिन उसे न्याय पाने के लिए जल समाधि लेने का निर्णय लेना पड़ सकता है। जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी तो लोगों को यह लगने लगा था, कि अब प्रदेश में गुंडा गर्दी समाप्त होगी और आम लोगों को न्याय भी मिलेगा, शुरुआत के दिनों में तो सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक न लाने क्या हुआ कि सरकार पटरी से उतरने लगेगी, जो भ्रष्टाचार सपा सरकार में था, वही भ्रष्टाचार भाजपा सरकार में भी होने लगा, कोई फर्क नहीं हुआ, आम लोगों का भाजपा पर से धीरे-धीरे विष्वास उठने लगा, एक दिन ऐसा आया कि आम आदमी को न्याय पाने के लिए जल समाधि का सहारा लेना पड़ा, अगर किसी राज्य में ऐसा दिन आ जाए कि आम आदमी को न्याय के लिए जल समाधि लेनी पड़े तो समझ लेना चाहिए, सरकार का कामकाज ठीक नहीं हैं। एक तरह से नेताओं और अधिकारियों ने राज्य को दीमक की तरह चाट ले रहे हैं।

 कलवारी थाना क्षेत्र के वैश्नोपुर निवासी जोखन और उनकी पत्नी ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी सहित अन्य सम्बंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि यदि उनके मकान के सामने से कप्तानगंज थाना क्षेत्र के नकटीदेई निवासी ओम प्रकाश द्वारा जबरिया रखा गया टीन टप्पर न हटवाया गया तो वे पत्नी समेत 22 अक्टूबर को सरयू नदी में जल समाधि ले लेंगे। जोखन ने बताया कि पहले उन्हांेने 20 अक्टूबर को सरयू में जल समाधि लेने की चेतावनी दिया था किन्तु कानूनगो ने आश्वासन दिया है कि 21 अक्टूबर तक उनकी समस्या का समाधान करा दिया जायेगा। इसे देखते हुये उन्होने पत्नी समेत जल समाधि का निर्णय दो दिन के लिये टाल दिया है।
कलवारी थाना क्षेत्र के वैश्नोपुर निवासी जोखन ने उच्चाधिकारियों को दिये पत्र में कहा है कि वे पत्नी के साथ पिछले 7 वर्षो से निरन्तर अपने अधिकार के लिये संघर्ष कर रहे हैं, दो बार पहले भी जल समाधि की चेतावनी दे चुके हैं, अधिकारियों के आश्वासन पर वे निर्णय टालते रहे किन्तु समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। जोखन ने चेतावनी दिया है कि यदि इस बार भी प्रशासन खरा न उतरा तो वे बाध्य होकर 22 अक्टूबर को सरयू नदी में जल समाधि ले लेंगे।