बस्ती। कुदरहा भले ही पिछड़ा क्षेत्र हो, लेकिन यहां के नेता, कारोबारी, पत्रकार और नर्सिगं होम के मालिक पिछड़े में नहीं आते है। नर्सिगं होम वालों में तो ऐसा लगता है, कि मानो पैसा कमाने के चक्कर में जज्जा-बच्चा को मारने का कंप्टीशन हो रहा है। इस क्षेत्र में चाहें मैक्स हास्पिटल हो या फिर चाहें प्रकाश नर्सिगं होम हो, बिना डाक्टर और स्टाफ नर्स के संचालित हो रहा है। कैसे बिना डाक्टर और स्टाफ नर्स के इन नर्सिगं होम में डिलीवरी और आपरेशन हो रहा है, यह सबसे गंभीर विषय क्षेत्र के लोगों, सीएचसी के एमओआईसी और नोडल के लिए है। इस क्षेत्र में एक से एक बड़े कहे जाने वाले भाजपा के नेतात्र नेतागिरी करते हैं, राजनीति भी करते हैं, मलाई भी काटते हैं, लेकिन किसी को गरीब गर्भवती महिलाओं के जीने-मरने की कोई परवाह नहीं। जब कि नेता चाहें तो इनकी मदद करके इन्हें भाजपा का वोटर बना सकते है। फर्जी नर्सिगं, पैथालाजी और अल्टासाउंड बंद करवाकर क्षेत्र के हीरो बन सकते हैं, लेकिन यह देश और प्रदेश के नेता बनने के चक्कर में अपने घर, गांव-गढ़ी को ही भूल जा रहे है। जब यह लोग गांव गढ़ी के लोगों को भूल जा रहे हैं, तो गांव-गढ़ी वाले भी इन्हें भूलते जा रहें है। इसी लिए बार-बार मीडिया कह रही है, कि यह लोग इस लायक भी नहीं हैं, कि अपना गांव जीता सके, या फिर 20-50 वोट दिला सके। यह देश के किसी भी कोने में रह लें, लेकिन इन्हें चुनाव के समय कुदरहा अपने गांव ही आना पड़ेगा। कहा भी जाता है, जो नेता अपना गांव नहीं जीता सकता, वह नेता कैसा? किसी नेता की समीक्षा और पार्टी के प्रति अगर उसकी निष्ठा देखनी हो तो चुनाव के समय मिले वोट को देख लीजिए। यकीन मानिए, सिर पकड़कर बैठ जाएगें। उदाहरण के तौर पर भाजपा के एमएलसी साहब अपने गांव को नहीं जीता पाते। ऐसे एमएलसी और संगठन के नेता के होने का पार्टी को क्या लाभ जो अपना गांव नहीं जीता सकता। बहरहाल, हम बात करहे थे, कि कुदरहा क्षेत्र के नर्सिगं होम की। मैक्स हास्पिटल के नीरज चौधरी के बारे में तो पूरी दुनिया जान और देख चुकी। दुनिया का यह पहला ऐसा नर्सिगं होम होगा, जो इस लिए सील हुआ क्यों कि यहां पर न तो कोई डाक्टर और न कोई स्टाफ नर्स रहता, जिसके चलते एक प्रसूता के बच्चे का धड़ बाहर और सिर पेट के अंदर रह गया, क्या कभी किसी ने ऐसा दर्दनाक घटना को सुना या देखा है। एक मां अपने पेट में मरे हुए बच्चे का सिर लिए कैली अस्पताल जाती है, वहां उसका आपरेशन के जरिए बच्चे का सिर निकाला जाता है। अभी भी महिला अस्पताल में ही है, और अपनी किस्मत और मैक्स के लोगों की दरिंदगी पर रो रही है। इसी मैक्स के नक्षेकदम पर उजियानपुर स्थित बेसमेंट में संचालित हो रहे, प्रकाश नर्सिगं होम भी चल रहा है। यहां पर भी बिना डाक्टर और स्टाफ नर्स के आपरेशन हो रहे हैं, किसी दिन इस हास्पिटल में भी मैक्स हास्पिटल जैसी घटना घट सकती हैं, और इसके लिए फिर नोडल डिप्टी सीएमओ डा. एसबी सिंह को जिम्मेदार माना जाएगा। जब यह और एमओआईसी जांच करने गए तो नर्सिंग होम में न तो डाक्टर मिले और न कोई स्टाफ नर्स, पता चला कि जिस डाक्टर की डिग्री पर इसे लाइसेंस मिला, वह लखनउ में अपने नर्सिगं होम में जमे रहते है। खास बात यह है, कि यह अस्पताल कुदरहा के एएनएम विनोदा सिंह के आलीशान मकान में संचालित हो रहा है, और माना जा रहा है, कि यही डिलीवरी और आपरेषन करती होगी। यह और इनका परिवार उपर रहता है, और नीचे का पोर्सन ओमप्रकाश चौधरी नामक व्यक्ति को किराए पर दे रखा। यह वही ओमप्रकाश चौधरी हैं, जिनका पिपरपाती में पटेल नाम से हास्पिटल चल रहा था, जब वहां पर विवाद हुआ, तो यह उजियानपुर आ गए, और विनोदा सिहं के मकान में नर्सिगं होम खोल लिया। अब आप समझ गए होगें कि क्यों इस अस्पताल में मैक्स जैसी घटना के होने की बात कही जा रही है। रही बात यहां के पत्रकारों की तो यह भी नीरज चौधरी और ओमप्रकाश चौधरी जैसे संवेदनहीन होते जा रहे है। इसकी शिकायत भाकियू भानू गुट के जिला उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी ने डीएम से करते हुए प्रकाश नर्सिगं होम को सील करने, लाइसेंस निरस्त करने और डाक्टर की डिग्री को निरस्त करने की मांग की है।
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